अमृतसर से करीब 22 किमी की दूरी पर स्थित है गांव कसेल। ग्रामीणों का कहना है कि त्रेता युग में जिस कौशलपुरी का उल्लेख किया गया है, वह कौशलपुरी आज का कसेल ही है। यहां स्थित प्राचीन शिव मंदिर में माता कौशल्या पूजा करने आती थीं। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष कहते हैं इस शिव मंदिर का निर्माण महाराजा विक्रमादित्य ने करवाया था। जनश्रुतियों के अनुसार इस मंदिर में महाराजा रणजीत सिंह ने भी पूजा-अर्चना की थी। कमेटी के सदस्यों ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि महाराजा ने दान में जमीन और 1800 रुपये सालाना जागीर लगाई थी। मंदिर के पास ही स्थित एक प्राचानी तालाब है। कहा जाता है कि इसे विक्रमादित्य ने खुदवाया था।
जनेर से मिली भगवान विष्णु की मूर्ति है मान्यता का आधार
मोगा से करीब 10 किमी की दूरी पर है गांव जनेर। टीले पर बसे इस गांव के लोगों की मान्यता है कि यह गांव राजा जनक का नगर रहा है। उनकी मान्यताओं का आधार यहां से मिली भगवान विष्णु की मूर्ति, मिट्टी बर्तनों के टुकड़े, मनके, प्राचीन ईंटें और सिक्के हैं। ग्रामीणों के अनुसार जनवरी 1968 में गांव के ही गुरमेल सिंह के घर में खुदाई के दौरान काले पत्थरों की बनी चतुभुर्जी भगवान विष्णु की मूर्ति मिली थी। वर्तमान में यह मूर्ति गांव के मंदिर में प्रतिष्ठापित है। वर्ष 1984-85 में एक स्थान पर खुदाई करते समय बड़े आकार के सिक्के और काले व लाल रंग के मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े व अन्य सामान मिले थे, जिसे पुरातत्व विभाग अपने साथ ले गया था।
जजनेर था जनेर का पुराना नाम
केंद्रीय विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त प्रोफेसर व इतिहासकार डॉक्टर सुभाष परिहार कहते हैं कि जनेर का पुराना नाम जजनेर था, जो अपभ्रंश होकर जनेर हो गया। डॉ. परिहार के अनुसार 11वीं सदी के आरंभ में तुर्क आक्रमणकारी अल्बरुनी ने अपनी पुस्तक 'अलहिंद' में तत्कालीन भारत के रास्ते और पड़ावों का जिक्र करते हुए लिखा है कि महमूद गजनवरी का एक पड़ाव पंजाब के जजनेर में डाला गया था। जनेर और कसेल का संबंध रामायण काल से है कि नहीं, इसके लिए शोध की जरूरत है। इसकी मान्यता के पीछे सिर्फ जनआस्था है। प्रवासी साहित्यकार नछत्तर सिंह बराड़ ने भी अपनी पुस्तक 'थेह वाला पिंड' में जनेर के इतिहास का उल्लेख किया है।




0 टिप्पणियाँ
if you have any doubts,plese let me know