बाराचवर (गाजीपुर) कक्षा 5 में पढ़ने वाले बालकों के बारे में जानते होंगे उनकी उम्र कितनी होगी इस उम्र में लड़के खेलते और पढ़ते हैं, लेकिन एक ऐसा बालक जो पांचवी में तो पढ़ता है ।लेकिन इस बालक का मन पढ़ाई में नहीं सन्यास में है, जो पल पल सोचता है, की हमें ईश्वर को पाना है। पाचवी में पढ़ने वाले इस बालक के साथ एक ऐसी घटना घटती है, जो इस  छोटे से बालक के  मन को और सुदृढ़ बनाती है।
 हम बात कर रहे हैं उस बालक की जो सन 2007 में सन्यास ग्रहण करता है। और 4 साल बाद बनता है, ऐसे मठ का महंत जो 400 साल पुराना मठ हैं।
  बलिया जिले के रसड़ा तहसील में स्थापित ये मठ,  रसड़ा मुख्य बाजार से 1 किलोमीटर की दूरी पर है। बलिया के साथ-साथ पूर्वांचल में विख्यात ये मठ   जहां सेंगर राजपूत रोट  पूजन करते हैं, जिसका नाम है श्रीनाथ मठ हैं। जो  श्री नाथ बाबा के नाम से पुरे बलिया और पूर्वांचल में विख्यात है।इसी मठ के महंत है , कौशलेंद्र गिरी जो  उत्तर प्रदेश के मठाधीशो  में सबसे कम उम्र के मठाधीश हैं। 

ननिहाल मे हो रहें,यज्ञ से बदला मन
श्री नाथ बाबा मठ के महंत कौशलेंद्र गिरी अपना भारत न्यूजट्रैक को बताते हैं,की  पाचवीं का परीक्षा देने के बाद मैं अपने ननिहाल गया था।जहा एक यज्ञ हो रहा था,उस यज्ञ में मै रोज जाता और वहां आये साधुओं के साथ बैठता और उनकी बाते सुनता जब यज्ञ समाप्त हो गया।उस यज्ञ में आये सभी लोग जाने लगे उसी यज्ञ मे हमारे माता पिता भी आये थे।यज्ञ समाप्त होने के बाद हमारे माता पिता हमें ले जाने लगें तब मैं जाने से मना कर दिया।वहां आये एक संन्यासी ने हमारे माता पिता से कहा की जाने दीजिए कुछ दिनो बाद ये बच्चा चला जायेगा।उसके बाद हमारे माता पिता वापस चले गये। कुछ दिनो तक मै उस सन्यासी के साथ रहा और उनके उनके द्वारा दिये गये उपदेशो को ग्रहण करने लगा ।कौशलेंद्र गिरी ने बताया की वहां से आने के बाद मैं कुछ दिन बनारस भी रहाऔर उसके बाद मैं वापस अपने घर चला आया।
*संन्यासी बनने पर माता पिता ने किया विरोध*
श्री नाथ बाबा के मठाधीश कौशलेंद्र गिरी बताते हैं,की सन् 2007 की बात है।इस मठ में मानस पाठ हो रहां था,और उस समय के महंत शम्भु गिरी को एक बालक की जरुरत थी ।तब उन्हें किसी ने बताया की एक बालक टिका  डउरी  नगपुरा में है,और कुछ सालों तक एक सन्यासी के साथ भी रहां ।उनके कहने पर  हमारे पिता जी हमें लेकर इस मठ पर आये चुकी शम्भु गिरी का सभी लोग सम्मान करते थे।इस लिए हमारे पिता जी लेकर खुद मठ पर आये।लेकिन जब उनको पता चला की कौशलेंद्र को संन्यासी बनाना चाहते हैं तब उन्होंने साफ मना कर दिया ।लेकिन इतना सुनते ही  हमारा मन तो प्रभु में और लीन हो गया।मेरे कहने के लाख बावजूद भी हमारे पीता जी विरोध करते रहें।उन्होंने बताया की करीब तीन साल तक चर्चा होती रहीं,लेकिन कुछ सम्मानित व्यक्तियों के कहने के बावजूद किसी तरह पीता जी तैयार हुए। और हमें इस मठ पर भेज दिया।और वो दिन भी आया जिसकी हमे सालो से तलाश थी।

सोलह साल की उम्र मे नबालिग बना सन्यासी
पाच साल से लेकर सोलह साल  का उम्र लड़कपन का उम्र होता हैं। इस उम्र में बच्चो का मन पढ़ने और खेलने में होता हैं।लेकिन एक बच्चा पढ़ने और खेलने के उम्र में सन्यासी बन जाय तो इसे भगवान की माया  ही कहा जायेगा। 
कौशलेंद्र गिरी जो सोलह साल की उम्र में सन्यासी बन कर  इश्वर के चरणो में अपने जीवन को  समर्पित कर दिया।

एक नबालिग बना मठाधीश
श्री नाथ मठ के मठाधीश कौशलेंद्र गिरी बताते हैं,की 16 नवम्बर सन् 2013 को हमारे गुरु व उस समय के मठाधीश रहें । शम्भु गिरी जी अपने शरीर को त्याग दिये।तब यहां के मठाधीश के लिए हमारे नाम की चर्चा होने लगी और सन् 2014 मे  हमे यहां का मठाधीश नियुक्त किया गया ।तब हमारी उम्र उन्नीस साल की हो चुकी थी।

मठाधीश बनाने पर हुआं, विरोध
एक सवाल के जबाब देते हुए, महंत कौशलेंद्र गिरी बताते हैं,की जब हमें महंत बनाया जा रहा था,तो उस समय हमारा खुल कर कुछ लोगों के द्वारा किया गया।क्षेत्र लोग जिनका मठ से लगाव हैं ,उनका सहयोग मिला क्यो की शम्भु गिरी ने अपने उत्तराधिकारी  व शिष्य बनाया था।


मठाधीश होते हुए किया आगे की पढाई
महंत कौशलेंद्र गिरी ने बताया की मठाधीश बनने के बाद  बारहवीं किया। और अब संस्कृत बिद्यालय से आचार्य कर रहा हुं।कौशलेंद्र गिरी ने बताया की अभी हमारी उम्र 25 साल हो रहा है।

ग्यारहवीं पीढी के महंत हैं, कौशलेंद्र गिरी
श्री नाथ बाबा मठ के ग्यारहवीं पीढी के कौशलेंद्र गिरी  मठाधीश है।इस मठ के प्रथम महंत सोमार नाथ गिरी महंत है।उन्होंने बताया की उनके बाद  बहुत मठाधीश हुए लेकिन सबसे कम उम्र का महंत  मै ही बना जिसे मै अपना सौभाग्य मानता हुं,  मै अपना मनुष्य रुपी जीवन प्रभु के चरणो मे समर्पित कर दिया।

पंचायती महानिर्माणी संप्रदाय
कौशलेंद्र गिरी बताते हैं,की हमारा संप्रदाय पंचायती महानिर्माणी अखड़ा है।इस अखाड़े के मठ देश में हर जगह आप को मिलेगा कौशलेंद्र गिरी ने कहा की श्री नाथ बाबा का मठ प्रदेश के तीन जिलो में है।जिसमे बस्ती, सिध्दार्थ नगर और देवरिया में स्थापित हैं।सभी यही से संचालित होते है।

राजनीति में जाने की जताई इच्छा
एक सवाल के जबाब में कौशलेंद्र गिरी ने कहा की मै  समाज सेवा कर रहा हुं ।देश में आये महामारी के दौरान मठ के अंतर्गत आने वाले करीब सौ दुकानदारों का किराया माफ कर दिया ।मठ के विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रो का अब तक का सारा फीस माफ कर दिया हुं।राजनीति में जाने की बात हैं,तो आगे देखा जायेगा

52 बिघे मे फैला है, मठ
श्री नाथ बाबा का मठ करीब 52 बिघे में फैला हुआ है.यही पर सेगर राजपूत ऐतिहासिक रोट पुजन करते हैं।जिसे देखने के लिए बलिया के अलावा और जिलो से भी लोग आते है।उस समय सेंगर राजपूत लाठी के साथ साथ घर में रखे हथियारों का भी पुजा करते हैं।