कामगार शोएब।
  रजनीश, बाराचवर (गाजीपुर) : लॉक डाउन की वजह हजारों मजदूरों और कामगारों के सामने रोजी रोजगार का संकट खड़ा हो गाया है।  स्थिति यह उत्‍पन्‍न हो गई है कि उन्‍हें दो वक्‍त की रोटी के लिए दूसरों को मुंह देखना पड़ा है।  ऐसे में लोग अपने सांसद, विधायक और ग्राम प्रधानों की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं।   हम बात कर रहे हैं  जिले के जहुराबाद विधानसभा क्षेत्र की जहां के विधायक हैं भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मंत्री ओम प्रकाश राजभर व भाजपा के बलिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद  वीरेंद्र सिंह मस्त।
 संकट की घड़ी में विधायक व सांसद ने नहीं ले रहे सुध
 जहुराबाद विधानसभा के कुछ गांव चकिया बाराचवर, माटां व   गोसलपुर के असहाय ग्रामीणों ने बताया कि इस समय दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाना मुश्किल हो गया हैं। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं को छोड़ किसी भी प्रतिनिधि से कोई सहायता नहीं मिला हैं।
 ग्रामीणों ने लगाए विधायक पर आरोप
श्रमिक 
जहुंराबाद विधानसभा के बाराचवर गांव निवासी मोहम्मद सोएब कहते हैं कि हमारे पास खेती के लिए 1 इंच भी जमीन नहीं हैं ।महामारी आने से पहले घरों का रंगाई पुताई कर परिवार का पालन पोषण कर लेता था।
एक सवाल के जवाब में सोएब ने कहां कि कोटे से जो चावल मिलता हैं उसी से इस समय गुजर हो रहा हैं। सवाल का जवाब देते हुए शोएब ने कहां कि विधायक  या सांसद  के तरफ से कोई भी सहायता नहीं मिला हैं। इसी गांव के लरी गोंड ने कहा कि साहब हम रोज कमाई ना और रोज खाइंना हमारा पास जमीन नईखे  रहें खातिर एगो।  मड़ई बा लेकिन ऐसा रोग आईल बा एकरा वजहं से कौनो काम नइखे। उन्होंने आगे कहां कि विधायक जी से भी  कुछ नइखे मिलत।
 फरिश्ता बने सामाजिक कार्यकर्ता
इस महामारी में बेसहारा लोगों के लिए कुछ सामाजिक कार्यकर्ता बेसहारा लोगों के लिए फरिश्ता साबित हो रहें हैं। कुछ बेसहारा ग्रामीणों का कहना हैं, कि विधायक और सांसद की तरफ से कोई भी सहायता अभी तक नहीं मिला हैं लेकिन हम लोगों के लिए कुछ सामाजिक कार्यकर्ता ही किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं। जिनकी वजह से इस मुसीबत की घड़ी में दो वक्त की रोटी मिल रहीं हैं।
 क्षेत्र में नहीं आते विधायक जी
जहुराबाद विधानसभा  क्षेत्र के बाराचवर ब्लॉक के कुछ ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने कहां कि सांसद जी हों या विधायक जी कोई भी चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र का दौरा नहीं किया। और इस आपदा की घड़ी में किसी भी जनप्रतिनिधि के तरफ से गरीबों असहाय लोगों के लिए कोई भी सहायता उपलब्ध नहीं कराया गया हैं। हलांकि इस संबंध में जानकारी हासिल करने के लिए कई बार फोन किया गया लेकिन विधायक ओमप्रकाश राजभर का पक्ष नहीं मिल पाया। 
अंधभक्‍तों को नहीं दिख रहा विधायक जी का काम
जिलाध्‍यक्ष रामजी राजभर
भारतीय समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष व विधायक प्रतिनिधि राम जी राजभर ने सारे आरोपों को खारिज करते हुए कहां कि विधायक जी बाराचवर में बनवासी व बसफोर बस्तियों में डेढ़ सौ पैकेट राशन वितरण किया हैं। और ऐसे जरूरतमंदों के लिए आगे हमारा अभियान चल रहां हैं, एक सवाल के जवाब में कहां कि विरोधियों का काम हैं भड़काना विधायक जी विधायक निधि से खरंजा व इंटरलॉकिंग का कार्य कराया हैं। किस-किस को ले जाकर काम दिखाया जाए कुछ अंधभक्त हैं जो कहं रहें हैं, कहां हुआं हैं। सवाल का जवाब देते हुए कहां कि बद्दोपुर  चकिया गांव में मैंने जायजा लिया। लेकिन उस गांव में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं हैं। जो भुखां हैं।  हम लगातार तत्पर हैं ऐसे लोगों को लगातार राशन उपलब्ध कराया जा रहां हैं जो इस संकट की घड़ी में दो वक्त खाने का जुगाड़ नहीं कर पा रहे हैं।
सांसद प्रतिनिधि ने कहा 36 लाख का दिया है राशन
 भाजपा के सांसद प्रतिनिधि ने कहां कि सांसद मस्‍त ने अपना एक महीने का तनख्वाह  और 36 लाख अलग  से शासन को दिया हैं। शासन अपना पॉलिसी बनाकर मदद कर रहीं हैं। एक सवाल के जवाब में कहां कि अलग से करने पर अफरा तफरी मच जाएगी अगर हम लोग राशन बाटे तो भीड़ हो जाएगी जो लॉक डाउन का उल्लंघन होगा अगर क्षेत्र का दौरा करेंगे तो भी लॉकडाउन का  उल्लंघन होगा। क्योंकि जनप्रतिनिधि होने के नाते काफी संख्या में लोग इकट्ठा हो जाएंगे ।
‍जिनको सहायता चाहिए वे मुझे करें फोन
सांसद प्रतिनिधि ने कहा कि कार्यकर्ताओं के माध्यम से जनमानस में सूचना दे दिया गया हैं, जिनके पास खाने के लिए राशन नहीं हैं कार्यकर्ताओं के माध्यम से संपर्क करें तुरंत सहायता किया जाएगा।
पूर्व मंत्री सदाब फातिमा ने नहीं उठाया फोन
जहुराबाद विधानसभा के पूर्व विधायक व मंत्री शादाब फातिमा से पत्रकार ने बात करना चाहा तो बार-बार फोन करने पर भी फोन उठाने का कष्ट नहीं किया। क्या इनके प्रति अपने क्षेत्रीय जनता के लिए इस संकट के दौर में कुशल जानने का कर्तव्य नहीं बनता हैं। क्षेत्रीय जनता ने आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री शादाब फातिमा जो मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर हैं  इस महामारी में अपने कार्यकर्ताओं के द्वारा हाल जानने का कष्ट नहीं किया। ग्रामीणों ने कहां कि जब चुनाव आता हैं तभी हम लोग जनप्रतिनिधियों को याद आते हैं।