![]() |
| थाना करीमुद्दीनपुर |
आरके मिश्रा, बाराचवर (गाजीपुर) जिले के मुहम्मदाबाद तहसील स्थित थाना करीमुद्दीनपुर का निर्माण पांच हजार रुपये में हुआ था। इस खबर पर सहसा किसी को यकीन नहीं होगा। यकीनन यह इसपर यकीन करना नामुमकीन है। लेकिन यह बात सत्य है। ब्रिटिश इंडिया के समय १९०२ में इस थाने का निर्माण अंग्रेजी सरकार ने करवाया था।
कहा जाता है कि सैयद मसूद सलार गाजी ने गाजीपुर को सन् 1820 मे स्थापित किया। समय बदला और गाजीपुर ब्रितानी हुकूमत के अधीन हुआ और गाजीपुर को अंग्रेजो जिला घोषित किया। और अपनी सत्ता चलाने के लिए थानो का निर्माण कराना शुरु कर दिया। हम बात कर रहें हैं जिला मुख्यालय से करीब चालीस किलोमीटर दूर अंग्रेजो द्वारा निर्मित करीमुद्दीनपुर थाने का उस समय गोरों ने कुछ ही जगह थानो का निर्माण कराया था। जिसमे करीमुद्दीनपुर थाना प्रमुख हैं। सन् 1902 मे हुआ था करीमुद्दीनपुर थाने का निर्माण
थानाध्यक्ष अशेषनाथ सिंह ने बताया कि गजेटियर के अनुसार थाने का निर्माण सन् 1902 मे ब्रिटिश हुक्मरानों ने कराया था। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि उस समय इस थाने के अंतर्गत बलिया जिले का कुछ हिस्सा भी आते थे। बुजुर्ग बताते हैं कि इस थाने में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को रखा जाता था ।
बलिया से 40 और गाजीपुर से 35 किमी की दूरी पर कराया था निर्माण
गोरो ने इस देश मे राज ऐसे ही नहीं किया करीमुद्दीनपुर थाने का निर्माण सोच समझ कर कराया की बलिया से चालीस व गाजीपुर जिला मुख्यालय से पैतिस किलोमीटर की दूरी पर पड़ता हैं। यहां के स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं की अंग्रेजो ने थाने का निर्माण बहुत सोच समझकर कराया था। लोग बताते हैं कि इस थाने क्षेत्र से सटा कुछ गांवो मे बगावत होती थीं, तो इसी थाने से घुड़सवार पुलिस जाती थीं। क्यो की बलिया से ये गांव 30 किलोमीटर दुरी पर पड़ता हैं। और करीमुद्दीनपुर से आठ से दस किलोमीटर की दूरी पर पड़ता है।
पांच हजार सात सौ चौवन रुपये आया था खर्च
थानाध्यक्ष अशेषनाथ सिंह ने बताया की रेकार्ड के मुताबिक अंग्रेजो ने सन् 1902 मे थाने का निर्माण पाचं हजार सात सो चौवन रुपये मे निर्माण कराया था। थाने मे जितने भी अवास उस समय बने थे सबकी लागत अलग अलग थी।
![]() |
| थाना परिसर करीमुद्दीनपुर। |
दो बिघा आठ बिसवां सोलह धुर मे बना थाना परिसर
थाने का निर्माण अंग्रेजो ने दो बिघा आठ बिसवां सोलह धुर मे कराया था। जिसमे स्टेशन आफिसर के लिए अवास सब स्पेक्टर अवास, हवालात, मालखाना, और सिपाहियों के लिए बनाए गये अवास मौजूद थे। बनाये गये कमरो की लागत अलग अलग
पुराने थाना परिसर की लागत उस समय अलग अलग थी। आफिस कि लागत 5774 रुपये, हवालात 113 रुपये, स्टेशन आफिसर अवास 131 रुपये, कास्टेबल अवास 5170 की लागत से निर्माण हुआं था। कास्टेबल के लिए बनाये गये थे। चार क्वाटर ब्रिटिश हुक्मरानों ने कास्टेबल के लिए चार क्वाटरो का निर्माण कराया था। क्यो की उस समय बहुत ही कम लोग अंग्रेजो की गुलामी करना पसंद करते थे। इन कास्टेबल मे ज्यादातर फिरंगी ही होते थे। भारतीयों की बात करे तो किसी थाने पर एकाद भारतीय ही मौजुद होते थे।
करीमुद्दीनपुर थाने मे रखे गये थे स्वतंत्रता सेनानी सरजूू पांडे
बुजुर्ग ग्रामीण बताते है की वो दौर सन् 1941- 42 का था। जब फिरंगियों के नाक मे दम करने वाले स्वतंत्रता सेनानी व कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सरजू पान्डेय को पकड़ा गया था। लोग बताते हैं कि गोरी सरकार ने सरजू पान्डेय को पकड़ कर इसी थाने मे बन्द किया था।
अस्तित्व के नाम पर बचे एकाद कमरे
करीमुद्दीनपुर थानाध्यक्ष अशेषनाथ सिंह बताते हैं की। उस समय के भवन गिर चुके हैं, उस समय के एकाद कमरे ही बचे है। वो भी जर्जर हो चुके हैं। कब गिर जाये किसी को पता नहीं।
हो चुका हैं नवनिर्माण
समय बदला देश आजाद हुआं इस देश और प्रदेश मे नेताओ ने राज करना शुरू किया। समय बदलता गया। थानो का आधुनिकीकरण होता गया 70,80 के दसक मे थाने का भवन गिरते गये। जो गिर गये पुनः बने नहीं, अशेषनाथ सिंह बताते हैं की। मेरे आने से पहले आरक्षियों के रहने के लिए कोई सुबिधा नहीं थी। दो चार भवन बने हैं। वो यहां के लोगों के जनसहयोग व मेरे प्रयास से रहने लायक हुआं है।

