सुजान सिंह के पास उस नगर के नई नवेली दुल्हन एक रात के लिए जाती थी । इस नगर के लोग जब परेसान हो गये तो राजा को मारने योजना बनाई। इसकी जानकारी जब सुजान सिंह को मिली तो उसने अपनी जगह पर अपने मंत्री पंडित श्यान जी तिवारी को सुला दिया, जिसे लोगों ने राजा सुजान सिंह समझ मार दिया गया।
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| गांव गंधपा में स्थित राजा सुजान सिंह का खंडहर हो चुका किला। |
रजनीश कुमार मिश्र , बाराचवर (गाजीपुर) : जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी और ब्लॉमुख्यालय से महज पांच किमी की दूरी पर बसा छोटा सा गांव गंधपा इन दिनों चर्चा में है। चर्चा इस गांव के बाहर स्थित टिले को लेकर है। कोई इसे महान राजा सुजान सिंह का टिला बताता है तो कोई क्रूर रजा सुजान का किला बताता है। खैर जितने मुंह उतनी बातें। ये सारे रहस्य खंडहर बन चुके किले पर उगी घास, खडित मुर्तिया और यहां स्थापित ब्रह्मस्थान के पास दफन है।
राजा सुजान सिंह गंधर्व की रियासत थी गंधपा
गांव के बाहर से होती यह पगडंडी लेजाती है राजा सुजान सिंह गंधर्व के उस हरस्यमय किले के खंडहरों तक। गंधपा के लोग इसे भूतहा किला भी कहते हैं। बहरहाल इस किले पिंजर पर गांव के लोग उपला पाथते हैं। अपने अतीत को समेटे इतिहास के पन्नो मे बिलुप्त हो चुके इस किले भग्नावशेषों के पास आज भी करीब तीन सौ साल पुराना ईट व मिट्टी के बर्तनो के कुछ अवशेष मिलते है । बुजुर्ग ग्रामीणों का कहना है की टीला इतना ऊचा था की इसके उपर से बिहार राज्य के बक्सर स्थित किले में जलने वाले मशाल दिखते थे। ग्रामीण बताते है की राजा ने किले के चारो तरफ तलाब बनवाया था बुजुर्ग ग्रामीण शिवधन बिन्द बताते है कि उनके दुश्मन उस किले मे प्रवेस न कर सके ।वहीं गांव के कुछ अन्य बुजुर्ग बताते है की सुजान सिंह अपने आने जाने के लिए नाव का प्रयोग करते थे ।
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| खंडहरों में थापे गए उपले। |
कभी किला था यह टिला
गांव के 78बर्षीय केशव प्रसाद ने बताया की इस टीले के उपर राजा सुजान सिंह गंधर्व ने किला बनवाया था । उस कीले के उपर से ही अपने रियासत पर नजर रखा करते थे ।राजा सुजान सिंह अपने किले के बाहर बहुत कम.ही आते थे ,क्यों की उनको डर था की उनके दुश्मन कभी भी उनको मार देगें ।
कुएं में छिपा है सुजान सिंह का खजाना
गांव के 110बर्षीय शिवधन बिन्द बताते है की राजा सुजान सिंह गंधर्व ने किले मे ही एक कुआं बनवाया था ।जब राज सुजान सिंह की मृत्यु हो गई तो सुजान सिंह का सारा धन दौलत व सारा अस्त्रशस्त्र उस कुए मे डाल कर बंन्द कर दिया गया। उस कुएं का छत आज भी दिखाई देता है जिसपर ग्रामीण उपले रखते है ।
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| इन आंखों ने देखा है सौ साल का इतिहास। |
तो क्या अय्यास राजा ने करवा दी थी ब्राह्मण मंत्री की हत्या
उस टीले के पास करीब तीन सौ साल पुराना ब्रम्ह बाबा श्यान जी का मंदिर भी है । कौन थे पंडित श्यान जी गांव के 110बर्षीय शिवधन बिन्द बताते है की पंडित श्यान जी क्रुर राजा सुजान सिंह के मंत्री हुआ करते थे ।शिवधन बताते है की राजा सुजान सिंह के बिरासत के लोगो का जब विवाह होता था ।तो सुजान सिंह के पास उस नगर के नइनवेली दुल्हन एक रात के लिए जाती थी । इस नगर के लोग जब परेसान हो गये तो राजा को मारने के लिए सोच बिचार करने लगे ।इस बात की जानकारी सुजान सिंह को लग गई शिवधन बताते है की मै अपने बुजुर्गों से सुना है ।की रात मे सोने के वक्त अपने स्थान सुजान सिंह ने अपने मंत्री पंडित श्यान जी तिवारी को सुला दिया ।जिसे राजा सुजान सिंह समझ मार दिया गया।
गन्धपा गांव मे ही है पंडित श्यान जी के वंशज
वहीं श्यान जी तिवारी के वंशज 85बर्षीय कमलेश्वर तिवारी बताते है ।की राजा सुजान सिंह बहुत ही भले व अच्छे राजा थे ।उन्होंने ही यहां पर नगर बनाया था ,कमलेश्वर तिवारी बताते है की सुजान सिंह गंधर्व अपने रियासत का ध्यान अच्छे से रखते थे ।
टीले पर बनी है सुरंग
बुजुर्ग ग्रामीण बताते है की इस किले के टीले मे सुरंग दफन है ।जो राजा सुजान सिंह दुश्मनो से घिरने के बाद वहां से बच कर जाने के लिए बनवाया था । टीले पर मिट्टी से ढका हुआ दिखता है सुर्खी चूने से बना हुआ छत आज भी गन्धपा गांव मे अपने असतित्व को समेटे हुए टीले की मिट्टी से दबा हुआ सुर्खी चुने से बना कीले का छत आज भी दिखाई देता है।
खंडित मूर्ति और ढंका कुंआ चीख-चीख कर देता है गवाही
सुजान सिंह के उस टीले पर आज भी पत्थर का खंडिंत देबी देवता की मुर्ति आज भी मौजूद है ।गांव के बुजुर्ग शिवधन बिन्द बताते है की ये खंडित भगवान की मुर्ति राजा सुजान सिंह के जमाने की है । खुदाई होने पर मिल सकते है कुछ अवशेष। ग्रामीण बताते है की अगर सरकार के द्वारा यहां पर खुदाई करया जाय तो बहुत से रहस्य। पुरातत्व बिभाग को मिलेंगे।
ग्रामीण कर रहे हैं अतिक्रमण
उस ऐतिहासिक टीले पर गांव के लोग अतिक्रमण कर रहे है।वो टीला ग्रामीणों के लिये उपले व घास फुस रखने का साधन बन गया है ।इस गांव के लोगो का कहना. है की गावं के प्रधान को चाहिए की जिले के डीएम से मिलकर इस जगह की पुरात्तव बिभाग द्वारा खुदाई कराये ।ताकी इस टीले मे दफ्न सच्चाई बाहर आये।






