रजनीश मिश्र, गाजीपुर : गंगा में आए बाढ़ का पानी तो उतर गया है। लेकिन, अपने पीछे छोड़ गया है बर्बादी और बेबसी की वो निशनी जिसे सरकारी भाषा में प्राकृतिक आपदा कहा जाता है। और इसी प्राकृति आपदा पर सियासत भी शुरू हो गई है। लेकिन सच्चाई यह है कि गंगा का पानी आया तो मारा गया तो मारा और इसी मारामारी के बीच किसान पिस रहे हैं।
मानसून का विदाई सत्र किसानों पर इतना भारी पड़ा कि वाराणसी, गाजीपुर और बलिया सहित पूर्वांचल के कई जिले बाढ़ से बेहाल रहे। हजारों लाखों लोगों को पलायन करना पड़ा। यदि लहुरी काशी के नाम मसहूर गाजीपुर की बात करें तो यहां आम दिनों में शांत रहने वाली गांगा में इस कदर उफान आया कि बाढ़ का पानी खेतों के साथ-साथ शहर में भी भर गया। हालत यह हुई श्मशान घाट छोड़ गलियों में शव जलाना पड़ गया था। यही नहीं बाढ़ की चपेट में आने से धान और सब्जियों की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई थी।
200 से अधिक गांव हुए थे प्रभावित
नुकासन की बात करें तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गंगा और उनकी सहायक नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों के दो सौ से अधिक गांवों के 1.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने सन 1978 के बाद ऐसी बाढ़ पहली बार देखा है। जब, गंगा का पानी खतरे के निशान से करीब ढाई मीटर उपर बह रहा था। गंगा में आई इस बाढ़ के लिए लोग माता टीना बांध को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। क्योंकि इसी बांध से 5 लाख क्यूसिक पानी गंगा में छोड़ा गया था। इसके अलावा जाते-जाते पूर्वांचल में मानसून भी सक्रिय हो गया था, जिसकी वजह से सूखा मार झेल रहे किसानों गंगा की सहायक नदियों में आई बाढ़ का भी सामना करना पड़ा।
इन ब्लॉकों के किसान हुए हैं प्रभावित
गंगा किनारे बसे गाजीपुर के स्टीमर घाट, पोस्ता घाट, कोयला घाट, सिकंदरपुर, नवापुरा, तलुसिया का पुल, शास्त्री नगर जैसे दर्जनों घाट और मोहल्लों में पानी भर गया था। इसके अलावा ब्लॉकों की बात करें तो जिले के करंडा, सैदपुर, मोहम्मदाबाद, भावंरकोल, रेवतीपुर, गहमर प्रभावित हुए हैं। गांवों की बात करें तो धरमर्रपुर कटरिया, गोसंदेपुर, बड़सरा, चोचकपुर, रामपुर मांझा, सैदपुर औडि़हार तक गंगा और गोमती के पानी ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी। यह था गाजीपुर के पश्चिमी इलाकों को हाल। पूर्वी क्षेत्र की बात करें तो मुहम्मदाबाद ब्लॉक गौसपुर, सुल्तानपुर, सहबाजकुली, हाटा सहित दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों की फसलों को गंगा और मंगई नदी का प्रभाव झेलना पड़ा । इसी तरह भांवरकोल ब्लॉक शेरपुर, भांवरकोल, कुंडेसर सहित अन्य गांवों के किसानों को भी गंगा, कर्मनाशा और मंगई नदी के बाढ़ का सामना करना पड़ा। यहां तक कि गंगा के कटान के कारण तटवर्ती क्षेत्र के लोगों पलायन करना पड़ा।
शेरपुर निवासी 70 वर्षी राजाराम राय कहते हैं कि बाढ़ तो 2013 में भी आई थी। लेकिन, इस बाद की बाढ़ 1978 में आई बाढ़ जैसी थी। वो कहते हैं उस समय खुद उनका दो मंडा, हरिहर राय का चार मंडा और रामबदन राय का डेढ़ मंडा खेत गंगा में समा गया था।
बढ़ गए सब्जियों के भाव
इसे बाढ़ का असर ही कहें कि गाजीपुर में इन दिनों सब्जियों के भाव आसमान छू रहे हैं। यदि बात करें बजार भाव की तो- खुदरा में 80 रुपये किलो परवल, 60 रुपये बैंगन, 50 रुपये कुंदरु, लोबिया। 70-80 रुपये टमाटर, 65-70 प्याज और 30 रुपये की एक फूल गोभी मिली रही है। तोरी, भिंडी, करेला और पालक जैसी सब्जियां तो लगभग खत्म ही हो गई हैं। बढ़ी महंगाई के पीछे बाढ़ को कारण बताया जा रहा है।
किस्मत को कोस रहे हैं किसान
भांवरकोल ब्लॉक के किसान हरिकिशुन, राम दहीन और गंगाबीशुन ने कहा कि वह का बताईं बताट पर लेकर धान लगाए थे, बाढ़ ने सब खत्म कर दिया। न इधर के रही न उधर के। इसी तरह मुहम्मदाबादा ब्लॉक हरिहर तिवारी, शंकर राय ने कहा कि हम तीन चार किसान 13 बिघे में केवल मिर्च की खेती की थी। इसी तरह सियावर ने कहा कि उन्होंने पांच बिघे में टमाटर लगाया था। बाढ़ के पानी ने सब खत्म कर दिया। कुछ इसी रत की परेशानी भांवरकोल ब्लॉक के किसानों को भी है। किसी ने पेशगी तो किसनी ने अपनी जमीन में 5 से 10 बिघे में बैंगन उगाया था। तो किसी आठ से दस एकड में गोभी और परवल की खेती की थी, लेकिन बाढ़ ने सब खत्म कर दिया।
हरिहर तिवारी का कहना है कि पिछली बार सांसद मनोज सिन्हा की वजह से सब्जियों की खेती में काफी मुनाफा हुआ। इससे उत्साहित हो कर इसबार किसानों ने सब्जियों का रबका बढ़ा दिया था, लेकिन सब चौपट हो गया।
सरकार सो रही है : अफजाल अंसारी
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| सांसद अफजाल अंसारी। |
इधर, बहुजन समाज पार्टी से सांसद अफजाल अंसारी ने केंद्र और राज्य सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि किसनों का दुख समझने की बजाया सरकार सो रही है। जिले में करीब 2000 हेक्टेर में धान और सब्जियों की काश्त प्रभावित हुई है। बाढ़ से सडके जगह-जगह टूट गई हैं। यहां तक कि कई जगह पुल भी बह गए हैं, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें सो रहीं है। राहत एवं बचाव का कार्य रत्तिभर का नहीं हुआ। किसान से लेकर व्यापारी तक रो रहे हैं। लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही है।
आरोप गलत हैं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास के कार्य जारी है
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| एमएलए डॉ: संगीता बलवंत । |
गाजीपुर सदर की भजपा विधायक संगीता बलवंत ने कहा कि सपा सांसद के सभी आरोप बे बुनियाद हैं। सरकार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास का कार्य शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी जी और पूर्व सांसद मनोज सिन्हा ने भी क्षेत्र का दौरा किया है। नुकासान के आंकलन के लिए गिरदावरी का काम शुरू कर दिया है। सड़कों और पुलों की मरम्मत भी करवाई जा रही है। सरकार की ओर से बाढ़ पीडि़तो की पूरी मदद की जाएगी।


