1990 और 1992 के श्री रामजन्‍म भूमि आंदोलन में भाग लेने वाले चंद्रमा कुशवाहा।
  गांव बाराचवर निवासी  चंद्रमा कुशवाहा उन हजारों कारसेवों में से एक हैं जिन्‍होंने श्री राम मंदिर आंदोलन को न केवल नजदिक से देखा है बल्कि उन्‍होंने इसमें भाग भी लिया था 

गाजीपुर से रजनीश मिश्र की विशेष रिपोर्ट : सन 1992 यह वह दौर था जब श्री राम जन्‍म भूमि आंदोलन अपने चरम पर था। आरएसएस और विश्‍व हिंदू परिषद के आह्वान पर देशभर से कारसेवक अयोध्‍या पहुंचे थे। तब उत्‍तर प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और मुख्‍यमंत्री थे कल्‍याण सिंह। मुझे याद है जब कारसेवकों का हुजूम अयोध्‍या पहुंचा तो विवादित ढांचा ढह गया। 
यह कहना है कि गाजीपुर जिले के गांव बाराचवर निवासी चंद्रमा कुशवाहा का। चंद्रमा कुशवाहा उन हजारों कारसेवों में से एक हैं जिन्‍होंने श्री राम मंदिर आंदोलन को न केवल नजदिक से देखा है बल्कि उन्‍होंने इसमें भाग भी लिया था। 
 बेशक अयोध्‍या मामले में देश की सर्वोच्‍च न्‍यायालय का फैसला आए एक सप्‍ताह से अधिक का समय हो गया है, लेकिन चंद्रमा कुशवाहा के लिए लगता है कि यह फैसला आज ही आया है।  विश्‍वहिंदू परिषद के सक्रिय कार्यकर्ता चंद्रमा कहते हैं कि  जिस दिन सुप्रिम कोर्ट का फैसल श्री राम जन्‍मभूमि के पक्ष में आया उस दिन उन्‍हें इतनी खुशी हुई जिस दिन उनकी पहली संतान होने पर भी नहीं हुई थी। 
चंद्रमा उन दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि उस समय वह विहिप कार्यकर्ता के रूप में ब्‍लॉक बाराचवर का नेतृत्‍व कर रहे थे।  परिषद के आह्वान पर वह कई बार कारसेवक के रूप में अयोध्‍या गए थे।   चंद्रमा कहते हैं कि उस दिन को याद कर उनमें आज भी जोश भर आता है।    
   जनाब मंदिर के लिए रामभक्‍तों ने कुर्बानियां दी है
     विहिप कार्यकर्ता चंद्रमा कुशवाहा बताते हैं । वह 1990 का दौर था। आंदोलन अपने चरम पर था। प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। इसके मुखिया मुलायम सिंह यादव थे।  विश्व हिंदू परिषद व आर एस एस के आह्वान पर भारतभर से कारसेकों ने अयोध्या के लिए कूच किया था। जिसमें गाजीपुर से भी कारसेवक गए हुए थे।  उस कारसेवकों में  मैं भी था। लेकिन, पुलिस ने अयोध्या पहुंचते ही सैकड़ों कारसेवकों के साथ मुझे भी पकड़ लिया।  लेकिन प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद  लाखों की तादाद में कारसेवक अयोध्या पहुंच गए । लेकिन मौजूदा सरकार के आदेश पर  पुलिस ने गोली निहत्‍थे कार सेवकों पर गोलियां चलाई ।जिसमें बहुत से कारसेवक मारे गए। मुझे वह मंजर आज भी याद है। बहुत से कारसेवकों को लापता बता दिया है, जिनका आज तक कोई पता नहीं चला। और ना ही पुलिस रिकॉर्ड में उनका कोई नाम है। 
  1992 जब मंदिर निर्माण के लिए पहुंचे थे कार सेवक    

 विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता चंद्रमा कुशवाहा बताते हैं कि सन 1992 में मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन हुआ था। जिसमें गाजीपुर से तो बहुत से कारसेवक पहुंचे थे । लेकिन बाराचवर ब्लॉक से सिर्फ मैं ही गया हुआ था। हम लोग  12:15 बजे उस स्थान पहुंच गए जहां राम मंदिर था । जिसे लोग बाबरी मस्जिद कहते थे, चंद्रमा कुशवाहा ने बताया कि गगनभेदी नारों के साथ मस्जिद के ढांचे पर कुछ कारसेवक चढ़ गए ।और शाम होते-होते वहां बने मस्जिद के ढांचे को गिरा दिया गया ।
 आधी दीवार लाहौरी और आधी चांदमार्का ईंटों की थी   
    चंद्रमा कुशवाहा बताते हैं कि मंदिर का निर्माण लाहौरी ईटों से किया गया था । जब, विवादित ढांचे की दिवार गिरी उस समय मैं भी वहां था। वहां से एक ईंट  लेकर आया था ।  जब गांव में मंदिर बनने लगा तो उसी में उस ईट को  दे दिया । जब मस्जिद के ढांचे को गिराया जा रहा था तब देखा तो मंदिर का दीवार जो लाहौरी ईटों  से बना था। और आधे दीवाल के ऊपर चांद मार्का ईट  से मस्जिद का दीवाल बनाया गया था । 
   
प्रस्तुत है चंद्रमा कुशवाहा से बातचीत के अंश 
  •  रिपोर्टर-आप विश्व हिंदू परिषद से कब से जुड़े हैं  
  • उत्‍तर -  मैं 1985 या 86 में विश्व हिंदू परिषद से जुड़ा था। आज विहिप के लिए कार्य कर रहा हूं।
  • रिपोर्टर :  बाबरी विध्वंस के समय अयोध्या गए थे तो आपने क्या देखा  
  •  उत्‍तर -   सुबह 12:15 बजे हम लोग उस स्थान पर पहुंचे और शांति से श्री राम चबूतरे की सफाइ्र कर रहे थे। पुराना मंदिर लाहोरी ईटो से  बना था। और उसके ऊपर बाबर ने चांद मार्का ईट से मस्जिद का ढांचा बना रखा था।  ऊपर जो ढांचा था उसे कार सेवकों ने शाम होते-होते ढहा दिया ।  
  • रिपोर्टर -  गांव व क्षेत्र से कितने लोग गए थे । 
  • उत्‍तर -    उस समय जिले से तो बहुत से कार सेवक मंदिर आंदोलन में गए हुए थे। लेकिन  बाराचवर ब्लॉक से सिर्फ मैं ही गया था।  
  • रिपोर्टर - फैसला आने के बाद कैसा महसूस कर रहे हैं।                         उत्‍तर - रामलला के पक्ष में फैसला आने से मैं गर्व  महसूस कर रहा हूं।  सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सभी वर्गों ने स्वागत किया है। यह सबसे बड़ी बात है। हमारी मन की इक्षा पुरी हुई है।
  •  रिपोर्टर  - आगे क्या इरादा है ।         
  •  उत्‍तर - अब देश की सबसे बड़ी कचहरी ने अपना फैसला सुना दिया है। अब वहां भव्‍य राम मंदिर बने। मंदिर ऐसा हो जो दुनिया में इकलौता हो। मंदिर निर्माण में सभी धर्म के लोगों को अपना सहयोग देना चाहिए। क्‍योंकि भगवान श्री राम को मार्यादा पुरुषोत्‍तम कहा जाता है। हम सभी की मर्यादा इसी में है कि सभी धर्मां के लोगों के सहयोग में मंदिर की एक-एक ईंट रखी जाए। 
  •  रिपोर्टर - राम मंदिर आंदोलन की कोई ऐसी घटना जिसे याद कर आप सिहर उठते हो।
  •  उत्‍तर - 6 दिसंबर 1990 का को काला दिन जब निहत्‍थे कारसेवकों पर मुलायम सिंह की सरकार ने गोलियां चलवाई थी। जिसमें कोलकाता से आए कोठारी बंधुओं के साथ अन्य कार सेवक कार सेवा करते हुए मारे गए थे ।                                      
  • रिपोर्टर - अब आप क्या कहना चाहेंगे ।    
  •  उत्‍तर : यह राम जी की महिमा ही है। फैसला आने से पहले लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे थे। सुप्रिम कोर्ट का फैसला आया। देश भर शांति है। फैसले से हर कोई खुश है। कुछ उन्‍मादी किश्‍म के लोग हैं जो शांति नहीं चाहते। क्‍योंकि उनकी राजनीति की दुकान खत्‍म हो गई है।  श्री राम मंदिर निर्माण में हिंदुओं के साथ मुस्‍लमान भी साथ दें और मस्जिद निर्माण में हिंदू। 
  • रिपोर्टर - सरकार से क्‍या चाहते हैं।
  • उत्‍तर - मंदिर के बाहर आंदोलन के दौरान शहीद हुए कोठारी बंधुओं की मूर्ति लगनी चाहिए। सरकार को चाहिए कि मंदिर प्रांगड़ में सरकार को एक शिलापट्ट लगवाना चाहिए जिनपर कार सेवा के दौरान शहीद होने वाले कारसेवकों के नाम खुदे हों। ताकि कारसेवकों के वलिदान को याद रखें।