सिद्धार्थ मिश्र की कलम से :  मित्रों उपासना भगवान सूर्य की उपासना उत्‍तम मानी गई है। महाभारत में कुंति और कर्ण की कथा आप जानते हैं। कर्ण की उत्‍पत्ति भी सूर्य से हुई थी। इस लिए उसे सूर्य पुत्र भी कहा जाता है। सूर्य को ऊर्जा सबसे बड़ा स्रोत माना गया है। इसे हमारे धर्मशास्‍त्र भी मानते हैं और विज्ञान भी। दूसरा सूर्य की उपासना का भी अपना विधान है। ब्रह्ममुहुर्त में सूर्य को जल देना और उनकी आराधना कराना उत्‍तम माना गया है। 
अब सवाल यह उठता है कि भगवान सूर्य की पूजा में किस पुष्‍प और चंदन का उपयोग किया जाए कि सूर्य देव प्रसन्‍न हों और उनकी कृपा बनी रहे।
भगवान आदित्‍य अर्थात सूर्य की उपासना के लिए भविष्‍यपुराण में बताया गया है कि यदि भगवान सूर्य को आक का फूल अर्पित कर दिया जाए तो सोने की दस अशर्फियां चढ़ाने जितना पुण्‍य प्राप्‍त होता है। 

शास्‍त्रों के अनुसार यदि आक का पुष्‍प न मिले तो गुड़हल, कनेर, कुश के फूलों से भी पूजा की जा सकती है। यदि ये पुष्‍प भी न मिले तो शमी, मौलसिरी, केसर, मालती, अरुषा, अशोक और पलाश आदि के  पुष्‍पों को भी सूर्य पूजा के लिए चयनित किया जा सकता है। इसके अलावा भगवान भास्‍कर को लाल चंदन भी अति प्रिय है। इसे घिस कर जल में मिला कर सुबह जल दें। शुभ होगा। 
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