रजनिश मिश्र, बाराचार (गाजीपुर) -: जिले के विकासखंड बाराचवर में अंग्रेजों ने करीब सन् 1900 सौ मैं प्राथमिक पाठशाला का निर्माण कराया था । जिसमें पढ़ने के लिए ब्लॉक मुख्यालय के करीब 10 से 15 किलोमीटर की दूरी के बच्चे उस समय आते थे क्योंकि ब्रितानी हुकूमत में मोहम्मदाबाद तहसील के अंतर्गत जहुराबाद परगना में केवल कुछ गिने-चुने ही विद्यालय थे।।
अंग्रेजों ने बनवाये थे तीन कमरे
गांव के बुजुर्ग 85 वर्षीय रामदेव सिंह ने बताया की जिस समय मैं विद्यालय जाना शुरू किया वो दौर सन् 1945 का था । रामदेव सिंह ने बताया कि सन् 1945 में अंग्रेजों ने पाठशाला के तौर पर सिर्फ तीन कमरे खपड़ैल के बनवाए थे। जिसमें बच्चों को शिक्षा ग्रहण कराया जाता था ।
उस समय ब्लॉक नहीं परगना हुआ करता था
सन 19सौ मे हुआ था निर्माण
रामचीज सिंह ने बताया कि मैं अपने शिक्षकों से सुना था कि इस विद्यालय का निर्माण अंग्रेजों ने इस क्षेत्र के बच्चों को पढ़ने के लिए सन उन्नीस सौ में निर्माण कराया था। उन्होंने बताया कि इस विद्यालय मैं मुझसे भी ज्यादा उम्र के लोग पढे़े हैं। जो आज इस दुनिया में नहीं है शिक्षक रांमचीज सिंह ने बताया कि अंग्रेजों ने तीन कमरों का निर्माण कराया था ।जिसमें ईटों की दीवाल और ऊपर खपरैल से ढका हुआ था।
ब्रिटिश कालीन पाठशाला से निकले होनहार
इस ब्रिटिश कालीन पाठशाला से पढ़कर कइ होनहार छात्र निकले हैं ।जो देश के अलग-अलग पदों पर नियुक्त हुए जिसमें 89 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक रामचीज सिंह जो मिडिल स्कूल के प्रिंसिपल रह चुके हैं रामप्रवेश सिंह जो अफीम फैक्ट्री के एमडी रह चुके हैं रमाकांत सिंह भारतीय फौज में कप्तान के पद से रिटायर हुए ह्रीदय नारायण सिंह वो भी भारतीय फौज के कप्तान के पद से रिटायर हुए इस विद्यालय में दूसरे गांव के जो बच्चे पढ़ते थे ।उनमें भी कुछ लोग उच्च पदों पर पहुंचे और रिटायर हुए।
ब्रिटिश कालिन पाठशाला ने दिये छःदर्जन से अधिक शिक्षक गांव के 76 वर्षीय रिटायर शिक्षक श्री त्रिभुवन पांडे ने बताया कि इस पुराने पाठशाला में पढ़े करीब 6 दर्जन छात्र शिक्षक के पद पर नियुक्त हुए ।उन्होंने कहा कि इसी विद्यालय से मैं भी पढ़ा था गांव के ही एक और 74 वर्षीय रिटायर शिक्षक श्री नंन्दकिशोर मिश्र ने बताया कि इस पाठशाला में पढ़े हुए छात्र जो शिक्षक बने उसमें ज्यादा लोग रिटायर हो चुके हैं ।और कुछ कार्यरत है ।।
कक्षा चार तक होते थे प्राइमरी पाठशाला
89 वर्षीय रिटायर शिक्षक श्री रामचीज सिंह बताते हैं कि 1941 और 42 में प्राइमरी की पढ़ाई कक्षा 4 तक ही की जाती थी ।और पांच से छः सात की पढ़ाई मिडिल की मानी जाती थी ।रामचीज सिंह ने बताया कि सात की पढ़ाई करने के बाद लोग बीटीसी कर लेते थे ।और शिक्षक बन जाते थे।। सन 1941मे 50 से भी कम थे बच्चे
गांव के सबसे बुजुर्ग रामचीज सिंह ने बताया कि उस जमाने में सभी कक्षा मिलाकर सिर्फ पच्चास बच्चे ही होते थे। जिसमें लड़कियों की संख्या काफी कम थी क्योंकि उस समय शिक्षा का काफी अभाव था ।ज्यादा लोग अपने बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए नहीं भेजते थे उस समय जो लोग थोड़ा बहुत शिक्षित थे वही अपने बच्चों को शिक्षा ग्रहण के लिए भेजते थे ।
ब्रितानी हुकूमत मे पढाये जाते थे सिर्फ हिन्दी व ऊर्दू
85 वर्षीय बुजुर्ग रामदेव सिंह ने बताया कि उस समय केवल हिंन्दी व ऊर्दू ही पढ़ाया जाता था। रामदेव सिंह कहते हैं कि उस समय कक्षा 1 और 2 की फिस एक आने और दो आने थी वही कक्षा 3 की फीस 25 पैसा था!
आज भी पढ़ रहे है 200 बच्चे
आज के समय में चारों तरफ इंग्लिश मीडियम व पब्लिक स्कूल खुल गए है ।लेकिन फिर भी चारों तरफ पब्लिक स्कूलों से गिरे इस ब्रिटिश कालीन प्राइमरी पाठशाला मेंआज के समय करीब 200 के आस पास बच्चे आज भी शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि इस पुराने विद्यालय में आज भी काफी अच्छी पढ़ाई की जाती है । इसलिए हम लोग अपने बच्चों को इस विद्यालय में भेजते हैं।।
समय के साथ साथ बदलता गया विद्यालय
गांव के अन्य बुजुर्गों का कहना है कि जैसे-जैसे समय बदलता गया वैसे ही इस विद्यालय में भी बदलाव आता गया ।गांव के बुजुर्गों ने कहा कि पहले तीन कमरे थे और अब इस विद्यालय में कमरों की कमी नहीं है ।और ये विद्यालय इंग्लिश मीडियम प्राथमिक विद्यालय बन चुका है जिसमें काफी अच्छी पढ़ाई होती है।

