सिद्धार्थ मिश्र की कलम से : प्राय: हर घर में किसी न किसी शुभ अवसर पर मांगलिक कार्य संपादित किए जाते हैं। मंदिरों में इष्ट देव की आराधना हो या पूजा या फिर वैदिक मंत्रों का पाठ। इन सभी कार्यों में फूलों का इस्तेमाल जरूर किया जाता है।
इष्ट देव की पूजा के समय उन पर फूल चढ़ा देने मात्र से ही हम पुण्य के भागी नहीं बन जाते, क्योंकि प्रत्येक देवी-देवता का अपना पसंदीदा पुष्प होता है जिसे विधि-विधान के अनुसार उन पर श्रद्धा के साथ समर्पित किया जाता है। देव पूजन विधि के अनुसार यदि गलत विधि से अप्रिय फूल किसी देवता को चढ़ा दिया जाए तो अनिष्ट भी हो सकता है। इसलिए पुष्पों के बारे में यह जान लेना आवश्यक हो जाता है कि कौन सा पुष्प किस देवता को चढ़ाया जाना चाहिए।
विभिन्न देवी देवताओं के उनके अपने विहित एवं निषिद्ध पुष्प-पत्र होते हैं। वे पुष्प-पत्र भगवान पर नहीं चढ़ाए जाते हैं जो अपवित्र बर्तन या स्थान पर रखे गए हैं। कीडे़ लगे, जमीन पर गिरे, अनखिले, कली एवं सड़े-गले या बासी पुष्प भी निषिद्ध माने जाते हैं। कुम्हलाया हुआ, नाक से सूंघा हुआ, अंग से स्पर्ष्श किया हुआ या किसी अन्य देवता पर पहले से चढ़ाया गया पुष्प भी निषिद्ध माना जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार अलग-अलग देवी-देवताओं की उपासना के लिए अलग-अलग पुष्प विहित हैं। (क्रमश:)
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विभिन्न देवी देवताओं के उनके अपने विहित एवं निषिद्ध पुष्प-पत्र होते हैं। वे पुष्प-पत्र भगवान पर नहीं चढ़ाए जाते हैं जो अपवित्र बर्तन या स्थान पर रखे गए हैं। कीडे़ लगे, जमीन पर गिरे, अनखिले, कली एवं सड़े-गले या बासी पुष्प भी निषिद्ध माने जाते हैं। कुम्हलाया हुआ, नाक से सूंघा हुआ, अंग से स्पर्ष्श किया हुआ या किसी अन्य देवता पर पहले से चढ़ाया गया पुष्प भी निषिद्ध माना जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार अलग-अलग देवी-देवताओं की उपासना के लिए अलग-अलग पुष्प विहित हैं। (क्रमश:)
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