अमृतसर (पंजाब) : गत सोमार को भारत सरकार द्वारा धारा 370 और 35ए खत्‍म किए जानके के बाद से पाकिस्‍तान को समझ नहीं आ रहा है कि वो क्‍या करे। पाक में पल रहे आतंकियों और वहां के राजनीतिज्ञों के दबाव में पाकिस्‍तानी हुकम्‍रान आए दिन ऐसी हरतें कर रहा है जो उसे परेशानी में डाल रहा है।
   दो दिन पहले ही जहां पाकिस्‍तान से भारत से अपने राजदूत वापस बुला लिए और भारत द्विपक्षीय व्‍यापार खत्‍म के बाद आठ अगस्‍त को पाक रेलवे ने समझौता एक्‍सप्रेस को अटारी लाने से इनकार कर दिया। इसके पीछे पाकिस्‍तान रेलवे ने सुरक्षा कराणों का हवला देते हुए समझौता एक्‍सप्रेस के चालक दल ने उसे बाघा रेलवे स्‍टेशन पर ही खड़ा दिया।  इसके बाद इसकी सूचना भारत सरकार को दी।  इसके बाद भारत सरकार ने दोनो देशों के बीच चलने वाली मालगाड़ी ड्राइवर व गार्ड को समझौता एक्‍सप्रेस लाने बाघा भेजा।
ट्रेन में सवार थे 110 यात्री
रेल अधिकारियों के मुताबकि पाकिस्‍तान से भारत आने वाली समझौता एक्‍सप्रेस में कुल 110 यात्री सवार थे। जबकि इधर अटारी रेलवे स्‍टेशन पाकिस्‍तान जाने वाली समझौता एक्‍सप्रेस में सवार कुल 70 यात्री पाकिस्‍तान जाने के इंतजार में थे। लेकिन, पाकिस्‍तान द्वारा बाघा में ट्रेन रोके जाने के बाद दोनों देशों के यात्री संसय में थे कि ट्रेन चलेगी या नहीं। यह असमंजस की स्थिति शाम तक बनी रही।
contact for advertisement काफी संख्‍या में जाते हैं दोनों देशों के यात्री
बता दें कि समझौता एक्‍सप्रेस से काफी संख्‍या में दोनों देशों के लोग अपने रिश्‍तेदारों से मिलने जाते आते हैं। यही नहीं इस ट्रेन पाकिस्‍तान से कई लोग भारत में अपना इलाज करवाने भी आते हैं। समझौता एक्‍सप्रेस का किराया सदा-ए-सरहद (दिल्‍ली-लाहौर के बीच चलने वाली बस) से काफी कम है।  सप्‍ताह में दो दिन चलने वाली समझौता एक्‍सप्रेस को दोनों देशों के बीच की जीवन रेखा मानी जाती है। जो सीमा पर भारी तनाव और दोनों देशों के बीच राजनीतिक तल्‍खी के बावजूद चलती रहती है। यह बात दिगर है किस इस ट्रेन से गाहे-बगाहे हेरोइन और नकली भारतीय करंसी पकड़ी जाती है जो पाकिस्‍तान में बैठे तस्‍कर भारत भेजते हैं।
1976 को शुरू हुई थी समझौता एक्‍सप्रेस
देश विभाजन के बाद दोनों देशों के बीच रेल और सड़क मार्ग की सेवाएं बंद हो गई थी।  1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद शिमला में हुए दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच हुए शिमला समझौतो के बाद समझौता एक्‍सप्रेस की नींव पड़ी। आधिकारिक तौर पर दोनों देशों ने आपस में फिर से रेल सेवा को बहाल करने पर सहमति जताई। फलस्‍वरूप 22 जुलाई 1976 को आधिकारिक तौर अटारी-लाहौर के बीच समझौता एक्‍सप्रेस की सेवा शुरू करने का फैसला लिया गया। उल्‍लेखनीय है कि आरंभिक दौर में समझौता एक्‍सप्रेस को रोज चलाया जाता था, लेकिन 1994 में इसे हफ्ते में दो दिन कर दिया गया। यही नहीं यह ट्रेन पहले लाहौर से दिल्‍ली के बीच चला करती थी। लेकिन अब यह लाहौर से अटारी तक चलती है।