झरोखा न्यूज नेटवर्क : पूर्व विदेश मंत्री भाजपा की प्रथम पंक्ति की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज को शायद धारा 370 हटने का ही इंताजर था। इसका आंदाजा सुषमा स्वराज के उस ट्वीट से भी लगाया जा सकता है जिसको उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस लेने से कुछ देर पहले प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को किया था। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा- 'प्रधान मंत्री जी, आपका हार्दिक अभिनन्दन, मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी।' यह उनकी जिंदगी का अंतिम ट्वीट था। इसके कुछ देर बाद उन्हें दिल का दौरा पडा और देर रात वह इस दुनिया को अलविदा कह गई।
सुषमा स्वराज भारतीय जनता पार्टी के पहली पंक्ति के उन नेताओं में सुमार थी अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवानी और मुरली मनारेहर जोशी के बाद आता है। सुषमा स्वाराज उन नेताओं में सुमार थी जिन्होंने 1985 में भारतीय जनता पार्टी की एक सीट से 304 सीटों तक की पूर्ण बहुमत वाली सरकार भी देखी। कभी अल्पमत की सरकार में रही सुषमा स्वराज पूर्ण बहुमत की भारतीय जनता पार्टी में विदेश मंत्री भी रहीं। विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने जो आयाम स्थापित किए है वह शायद ही कोई और कर सके। सुषमा के निधन से हर कोई स्तब्ध है। आखिर हो भी क्यों नहीं- सुबह वह फोन कर के प्रख्यात वकील हरिश साल्वे को बुलाती हैं कि आवो तुम अपनी एक रुपये फीस ले जाओ। उल्लेखनीय है कि हरिश साल्वे ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कुलभूषण जाधव का केस लड़ा और पाकिस्तान की जेल में बंध जाधव की फांसी रुकवाई।
पोषक तत्वों का है भंडार सी-बक्थोर्न
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कई आयाम स्थापित किए है सुषमा ने
67 वर्षीय सुषमा स्वराज ने न केवल अपने निजी जीवन में बल्कि जारनीतिक जीवन में भी मर्यादाओं और भारतीय परंपरा की गरिमा को सदैव बनाए रखा। उनकी स्वच्छ छवि और मृदुल व्यवहार हर किसी को अपना बना लेता था। चाहे वह सदन में हो या सदन के बाहर।
* 1970 में राजनीतिक करियर की शुरूआत करने वाली सुषमा छात्रजीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषण सु जुड़ी थीं। सुषमा 1977 में पहली बार हरियाणा विधान सभा की सदस्य बनीं। और हरियाणा सरकार में सबसे कम उम्र की मंत्री बनने का गौरव भी उन्हीं को है।
* 1990 में पहली बार राज्य सभा पहुंची और 1996 में पहली बार लोक सभा के लिए चुनीं गई। तो 1998 में दिल्ली की पहली महिला मुख्य मंत्री बनी।
* 1999 में पार्टी के निर्देश पर बेल्लारी से सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ी, तमिल सीखा।
* 2000-2003 तक केंद्र सरकार में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहीं। और 2003-2004 तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी रहीं। 20014 में नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार में विदेश मंत्री भी रही। और वह दो बार विदिशा से सांसद चुन कर आई थी। जबकि 2019 के चुनाव में उन्होंने खराब स्वास्थ्य कारणों से चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। बुधवार को दोपहर तीन बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
