अमृतसर : आस्था के आगे सभी बंदिशें टूट जाती हैं। चाहे वह सरहद की ही क्यों न हों। एक दूसरे के सीने पर संगीने ताने खड़े हिंदुस्तानी और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के जवान वीरवार को श्री गुरुग्रंथ साहिब के सामने नतमस्तक होते नजर आए।
भारत-पाकिस्तान के अटारी बार्डर पर रोज सैनिकों बूटों की पदचाप सुनाई देती थी, वहीं जो बोले सो निहाल के गगनभेदी जयकारे सरहद के इसपार और उसपार लग रहे थे। एक दूसरे के पारंपरिक दुशमन समझे जाने वाले भारत और पाकिस्तान की पुलिस टुकड़ी श्री गुरु ग्रंथ साहिब को झुक कर सलामी दे रही थी। देश के इतिहास में शायद यह पहला मौका था जब पाकिस्तान स्थित ननकाना साहिब ( श्री गुरु नानक देव जी की जन्म स्थली) से चल कर कोई अंतरराष्ट्रीय नगर कीर्तन 550वा प्रकाश पर्व मनाने के लिए भारतीय धरती पर आया हो।
अटारी चेक प्वाइंट पर शब्द गुरु यात्रा को ले जाने के लिए बस को फूलों से सजाया गया था। सोने की पालकी में ननकाना सहिब से लाए गए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पाव स्वरूप को सुशोभित किया गया। पांच प्यारों के नेतृत्व में जीरो लाइन से भारतीय सीमा में स्वर्ण जयंती द्वार तक पुष्प वर्षा के साथ लाया गया। इस के साथ भारत से पाकिस्तान गए 508 सिख श्रद्धालुओं का जत्था भी वतन लौट आया।
अटारी में नगर कीर्तन का स्वागत पंजाब सरकार के तीन मंत्रियों सहित, अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह औजला, केंद्रीय मंत्री और बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल, पूर्व उपमुख्यमंत्री और फिरोजपुर के सांसाद सुखबीर सिंह बादल, एसजीपीसी अध्यक्ष, अकालतख्त साहिब के जत्थेदार सहित अन्य लोग मौजूद थे। श्री हरमिंदर साहिब में रात्रि विश्राम के बाद यह नगर कीर्तन आज डेरा बाबा नानक के लिए रवाना हो गय। यह नगर कीर्तन देश के 17 प्रदेशों और पांच तख्तों से होकर गुजरेगा। जिसका 65 स्थानों पर भव्य स्वागत किया जाएगा। अपनी सौ दिन की यात्रा पूरी करने के बाद यह नगर कीर्तन पंजाब कपूरथला जिले के सुलतानपुर लोधी पहुंच कर संपन्न होगा।
